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Friday, July 9, 2021

महिला छात्रावास के सामने टूटी चारपाई

शीर्षक से लग रहा कि लेखक ने महिला छात्रावास की एक और टूटी हुई चीज पकड़ ली जैसे पिछले बार महिला छात्रावास की टूटी चारदीवारी थी।

खैर इस बार ये टूटी हुई चीज भी चारदीवारी न हो कर चारपाई है(लेखक को नंबर चार......से क्या है प्यार?)। लेकिन ये गर्ल्स हॉस्टल की ही संपत्ति है या नहीं इस पर कुछ नहीं कहा जा सकता(गुप्त सूत्रों से संपर्क नहीं हो सका है)।

महिला छात्रावास, जैसा कि पिछले बार बताया कि, हमेशा से लड़कों/पुरुषों के लिए एक कौतूहल का विषय रहा है चाहे तो आप इस बारे में बातें करते हुए पूरी रात गुजार सकते हैं। बस बातें मजेदार होनी चाहिए और छात्रावास की सिर्फ चारदीवारी पर केंद्रित न हो कर इसके मुख्य निवासियों पर होनी चाहिए(अरे भाई हम उन निवासियों की जीवनशैली और उनकी समस्याओं पर चर्चा की बात कर रहे हैं.......आप भी न कुछ भी सोच लेते हैं)।


अभी कुछ दिनों पहले मैं लोकडौन के बाद घर से वापस कॉलेज कैंपस लौटा। 

ये भी अजीब ही विडंबना है हम मेडिकल के छात्रों की। परीक्षा न हो तो कॉलेज को कोसते हैं और परीक्षा होने की सूचना आये तो टालने के बहाने ढूंढते हैं (खुद ने पढ़ाई नहीं की इस बारे में सोचने पर विषादग्रस्त होने का खतरा रहता है)।


घर से लौटने पर कैंपस में एक मजेदार चीज देखी। अब ये तो सर्वविदित है कि युगों युगों से महिला छात्रावास के सामने वाला पेड़ ही हम मेडिकल के छात्रों की असली मंजिल PMT रही है। जिसके लिए ही कई लोग AIPMT अर्थात नीतू जी(NEET UG) को अपनी परीक्षा के नंबर से रिझाने में लगे रहते हैं(जी हाँ, सही सुना आपने। कोटा के बच्चों को जब अपनी जवानी के शुरू में "उनके" कांटेक्ट नंबर के लिए मेहनत करना चाहिए तब वो टेस्ट में आने वाले नंबर के लिए मेहनत करते हैं)।


हमारा कॉलेज PMT से आगे बढ़ कर कुर्सी/बेंच तक पहुंच गया है(हम नई पीढ़ी के बच्चे हैं)।

गर्ल्स हॉस्टल के सामने PMT की छाँव में हमेशा लोहे की आपस में जुड़ी हुई 3 कुर्सियों वाली बेंच लगी रहती है। वो भी वहाँ इसलिए रखी हुई है क्योंकि उसमें जो बीच वाली कुर्सी थी वो किसी ने उखाड़ दी थी। अब वो दो गज की दूरी(क्योंकि हम कोरोना के नियमों का समर्थन करते हैं......दूरी की मजबूरी) वाली दो कुर्सियाँ बन गई हैं जो अब जुड़ी हुई हैं और रखी हुई है गर्ल्स हॉस्टल के सामने। अक्सर वो कुर्सी हॉट सीट रहती है हंसों के जोड़ों (कपल्स) के लिए।


कल मजेदार चीज ये देखी कि उसके सामने अब किसी ने चारपाई डाल दी है वो भी एक पैर टूटी हुई। अब ये समझ नहीं आ रहा कि किसी ने चारपाई तोड़ कर वहाँ डाल दी या वहाँ डाल कर तोड़ दी! चारपाई टूटने का तो मतलब समझते हैं ना आप?(हम फ्रैक्चर की बात कर रहे हैं.......बाकी आप जो सोच रहे हैं वो भी हो सकता है।)

अब इस चारपाई के वहाँ पहुँचने का इतिहास और उसका वर्तमान में इस्तेमाल क्या है? इस बारे में जाँच समिति का गठन करेंगे। आपको जवाब पता हो या आप इस जाँच समिति के सदस्य बनना चाहते हो तो नीचे टिप्पणी कर के जरूर बताइएगा।


संदर्भ व शब्दकोष:

शीर्षक में "टूटी" का प्रयोग विशेषण(adjective) का तौर पर है या क्रिया(verb) के तौर पर?

महिला छात्रावास की टूटी हुई चारदीवारी- इसी ब्लॉग में पहले से प्रकाशित एक रचना

विडंबना- दुविधा/समस्या

विषादग्रस्त- डिप्रेशन

PMT - पिया मिलन ट्री

नीतू जी - NEET UG हमारे कोटा वाले गुरु जी के द्वारा दिया गया नाम

कोटा- आप अपने शहर और प्रिय शिक्षक का नाम सोच लीजिये

हंसों का जोड़ा- कोरोना काल में मेडिकल कॉलेज का हाल भाग 1

चारपाई टूटना- अब इसका अर्थ भी बताना पड़ेगा?



आपका वरीय/कनीय/मित्र

वरुण(२०१७ बैच)

©Inking Scalpel®

Saturday, March 13, 2021

कोरोना काल में मेडिकल कॉलेज का हाल भाग-२

दूसरा भाग:

चार पाँच सीनियर लड़के एक स्वीट्स एंड स्नैक्स की दुकान पर खड़े थे और वहाँ एक होस्टल का जूनियर अपने डे स्की बैचमेट के साथ आ जाता है। सभी के मुहँ पर मास्क है। डे स्की बैचमेट अपने दोस्त को छोटी सी ट्रीट दे रहा होता है।

डे स्की जूनियर: "चल ना बे! क्या सोच रहा है?"
होस्टल वाला जूनियर: "भाई रुक जरा, एप्रोन के बटन तो लगाने दे।"
डे स्की जूनियर: "अरे चल ना यार, एक तो इतनी गर्मी है ऊपर से तू बटन लगा रहा। रहने दे ना, वैसे भी कौन सा यहाँ कोई सीनियर है? " फिर रुक कर दोबारा बोला:
"चल आज मैं तुझे पार्टी देता हूँ और ये पार्टी उन कंजूस सीनियर की तरह नहीं है कि रात भर जम के पेला और फिर बस एक समोसा और कोल्ड ड्रिंक दे कर भेज दिया।"

तभी होस्टल वाले जूनियर की आँखें सीनियर्स की घूरती आँखों से टकराई।

(अब यहां से बातें आंखों के इशारे में होगी)

सीनियर ने मन में सोचा- "ई कौन से चींटी महल का तोप है बे? ई हमलोग को पहीचानता नहीं क्या?"
होस्टल जूनियर ने आंखों से विनती की- "माफ़ कर दीजिए बॉस! आइंदा से ऐसा कभी नहीं होगा।"
सीनियर ने मन में सोचा- "इसको तो बेटा अब अलग से बुलाऊँगा परिचय सत्र में, मुर्गे की तरह बांग दिलवा कर अंडा देते हुए हीरोइन की तरह नाचेगा ये अब तो।"
होस्टल जूनियर ने फिर से इशारों में विनती की- "प्लीज प्लीज बॉस हमको छोड़ दीजियेगा । मम्मी कसम, हम अब कभी भी इसके साथ नहीं घूमेंगे। गलती हो गया बॉस।"
सीनियर ने होस्टल वाले जूनियर को आँखें तरेरी- "तू तो साला पवनवा है........ तुमको तो हम शरीफ समझते थे लेकिन तुम भी.........रुको बेटा अब पूरा बैच को बुलाएंगे परिचय सत्र में।"

विशेष बिंदु- कृप्या इसे सिर्फ हास्य व्यंग्य ही समझे, जिसका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है  (केवल बाहर वालों के लिए, बाकी अंदर की बात तो कुछ और ही है)।

इस भाग पर टिप्पणी देंगे तभी अगले भाग का प्रकाशन होगा।


धन्यवाद

आपका वरीय/कनीय/मित्र

वरुण(2017 बैच)


©Inking Scalpel®

Friday, November 20, 2020

कोरोना काल में मेडिकल कॉलेज का हाल भाग-१

प्रथम भाग:

दो वरीय हंसों का जोड़ा (अर्थात सीनियर कपल) मास्क लगाए हुए कॉलेज कैंपस में विचरण कर रहा है और बगल से मास्क लगा कर एक कनीय चूजा (अर्थात जूनियर लड़का) गुजर रहा है।

बॉस(वरीय हंसों के जोड़ा में पुरुष प्रजाति ) की सोच: ई नमूना कौन है बे? मास्कवा पर कुछो समझे नहीं आ रहा। साला टुकुर टुकुर इधर देख रहा है। अच्छा साला पवनवा है लगता है, इसका तो अलग से खबर लेंगे रात में बुलाएंगे इसको परिचय सत्र में। साला ढंग से 1 महीना हुआ नहीं है और हमरी बंदी पर नजर मार रहा है।


मैडम(अब इनके बारे में क्या बताएं, नशीली आंखों से ही खूबसूरती झलकती है) की सोच: न जाने काहे बुला लिया है मिलने को और अब बुलाया भी है तो उधर लड़का लोग का हॉस्टल का दरवाजा तरफ ही देख रहा है, ई नहीं कि हमरी ओर भी जरा देख ले। कितना कुछ पढ़ना है, परीक्षा नजदीक है। अच्छा ......उ तो कोई जूनियर लड़का जा रहा है ना, इधर बार बार काहे देख रहा है उ। ई सब लड़का लोग का अलगे नाटक चलता रहता है। अब हमसे 2 मिनट और ये कुछ नहीं बोला तो हम चल जाएंगे, हाँ नही तो।


कनीय लड़का की सोच: अच्छा है कि मास्क लगा लिए हैं, अब मस्त जीन्स टीशर्ट पहिन कर पर्फ्यूम मार कर फोकस में घूमेंगे, कौनो पहचानेगा भी नहीं........... अरे राम! राम! राम! ई किसको देख लिए भाई? .......साला लंगूर के हाथ में अंगूर। ई तो वही बोसवा है ना जो आँखें दिखा कर डरा देता है। इसको तो साला सबका नाम तक याद रहता है, लगता है कि दवा छोड़ कर हमहि लोग का नाम रटता रहता है। ई देखो तो कितनी खूबसूरत और मासूम मैडम को घुमा रहा है और एक हमरे बैच में सब की सब नकचढ़ी और बहन जी भरी पड़ी हैं। ना अक्ल न शक्ल और भाव खाती है किलो भर का जैसे भाव से ही पेट भरेगी। अरे बाप रे! ई बोसवा तो इधरे देख रहा है। भाग रे पवनवा मास्क टाइट कर के नहीं तो रात में पैंट ढीला और गीला दोनों करवा देगा ई बोसवा।



आपकी मेरी बातें: बस अब आपके प्यार का इंतजार है, मिलेगा तो इसके और भी भाग लिखूंगा अन्यथा इसका सफ़र यहीं तक था। धन्यवाद। कृप्या टिप्पणी करें कि आपको इसमें क्या पसंद आया।


आपका वरीय/कनीय/मित्र

वरुण (2017 बैच)

©Inking Scalpel®