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Sunday, September 26, 2021

Speaking Scalpel

चूजे.....ओए चमन चूजे......क्या?......सुन नहीं रहा है क्या?.....तेरे से ही बोल रहा हूँ.......क्या इधर उधर ऊपर नीचे दाएँ बाएँ देख रहा है.......मैं बोल रहा हूँ........अरे नीचे देखो.....नीचे तो देखो। 

हाँ, अब सुना न.....मतलब मीम की भाषा में बात करता हूँ तो तुरन्त बातें समझ आने लगती है। अजीब चमन चूजे हो बे। हैं.......क्या कहा...... कि पिता जी ने कहा था- मेडिकल कॉलेज में ऐश ही ऐश है। अरे रुको.... जरा सब्र करो। अभी कॉलेज के रंग ढंग शुरू तो होने दो।

हाँ तो मैं कह रहा था कि शर्म नहीं आती न जरा सी भी। इस्तेमाल करने के बाद कूड़े की तरह बक्से में डाल कर बैग के अंदर फेंक देते हो। यार कम से कम इतना तो लिहाज करो कि कल को दोबारा मुझसे ही काम लेना है। ये क्या है कि केवल पानी से धोया और चल पड़े? कम से कम सैनिटाइजर या साबुन का उपयोग कर लो। तुम्हें तो शर्म आती नहीं है। लंच ब्रेक से ठीक पहले DH में हाथों से मांस चीरते हो और लंच ब्रेक में दाँतों से। तुम तो मतलब मस्त हाथ वगैरह अच्छे से सेंट वाले साबुन से धो कर दिन भर घूमते रहते हो। सड़ना मुझे पड़ता है फैट, फॉर्मेलिन और मांस की गंदी बदबू के साथ अंधेरे कमरे में।
हाँ, सही पकड़े हो। मैं डिसेक्शन बॉक्स का राजा स्कालपेल बोल रहा हूँ। कान खोल कर सुन लो.......ये जो तुम कलियों को खुश करने के चक्कर में मुझे प्रसाद की तरह बाँटते फिरते हो न और भँवरों की तरह मँडराते रहते हो.......बहुत गंदा कटेगा तुम्हारा। मैं काटता हूँ तो सबको दिखा लेते हो न.......घाव का खून.......इनके द्वारा कटेगा तो न दिखा पाओगे न छुपा पाओगे। जो तुम सपने देख रहे हो कि हंसों का जोड़ा बनाओगे और RP में PR करोगे, सब धरा का धरा रह जायेगा।

ओए चूजे की महिला सहपाठी......किधर चल दी मुँह दबा कर हँसते हुए। तुम भी सुनो। ये क्या दिन भर हा हा ही ही करती रहती हो? DH में घुसते ही बैग कोने में फेंक कर कैडेवर पर आड़ी तिरछी रेखाएँ मार देती हो। थोड़ा प्यार से नहीं कर सकती हो? किसका गुस्सा किस पर निकालती हो? एक तो ढंग से पकड़ना आता नहीं है और पकड़ती भी हो तो फिर हड्डियों तक काट देती हो। ये क्या है मतलब? 
वैसे तुम साफ सफाई रखती हो इसलिए तुम थोड़ी अच्छी हो लेकिन तुम अक्सर भूल कैसे जाती हो मुझे कमरे में अकेला तन्हा? 
ओ..... अच्छा...... जब सब भँवरे अपना स्कालपेल लाते ही हैं तो तुम भी ला कर भीड़ क्यों बढ़ाओ या क्यों गंदा करो? गज़ब चालाक हो तुम तो।

वैसे एक बात बताओ, ये क्या रोना रहता है तुम्हारा कि हम नहीं छूएंगे, ग्लव्स नहीं पहने हैं इसलिए। हम नहीं काटेंगे क्योंकि गंदा लग रहा है। जब डिसेक्शन के लिए हाथों से स्किन उठाना है, फ्लैप बनाना है, फैट क्लियर कर के संरचनाओं का अध्ययन करना है तब किनारे चली जाती हो नाक मुँह सिकोड़ कर और जब गुरु जी पढ़ाने समझाने आते हैं तो एक हाथ नाक पर रख कर धक्का मुक्की करती हो गुरु जी के पास खड़ी हो कर समझने के लिए। Hypocrisy की भी सीमा होती है।

खैर चलो तुमलोग पढ़ाई लिखाई में मन लगाओ और डॉक्टर बनो जो दिल-दिमाग-शरीर का इलाज करे। दिल काटने तोड़ने पटकने मटकने के लिए माई बाबूजी नहीं भेजे हैं तुमको मेडिकल कॉलेज में......समझे?..... हम भी चलते हैं पढ़ने।

संदर्भ:
चूजा: प्रथम वर्ष के छात्र।
मीम: इसका मतलब नहीं समझते तो बेटा निकलो पहली फुर्सत में।
पिता जी की बातें: अब क्या बताएँ, सबको यही सुनने को मिला है कि इसके बाद ऐश है उसके बाद ऐश है। मैंने तो ऐश की एशेज(ashes) को गंगा बहा दिया।
लंच ब्रेक: मांसाहारी लोगों को बड़ी घिन आने लगती है यार।
अंधेरा कमरा: dissection बॉक्स
हंसों का जोड़ा: कोरोना काल मे मेडिकल कॉलेज का हाल भाग 1
कलियाँ, भँवरे, RP में PR: RP में PR(एक पूर्व प्रकाशित रचना)
DH: Dissection Hall/ दिल्लगी हॉल- अब जैसी जिसकी जरूरत
रेखाएँ: Incision lines
कैडेवर: Dead body
संरचना: structure

तो स्वागत कीजिये अपनी प्यारी प्यारी टिप्पणियों से हमारी इस नई रचना का।
धन्यवाद
आपका वरीय/कनीय/मित्र
वरुण(2017 बैच)
फ़ोटो क्रेडिट: प्रफ्फुल राज 2020 बैच
©Inking Scalpel®

Sunday, August 29, 2021

RP में PR

हर कॉलेज में कोई न कोई ऐसी जगह जरूर होती है जो हंसों जोड़ों के समय बिताने के लिए सुप्रसिद्ध हो जैसे स्टेडियम, पार्क, कैंटीन, आदि। ऐसी जगह जिसके होने की जानकारी तो सभी को होती है लेकिन फिर भी उसके होने वाले विभिन्न प्रयोग की जानकारी कुछ को ही होती है। कॉलेज में मौजूद हर बच्चे को उस जगह के होने वाले उपयोग की एक अलग ही जानकारी होती है। सीधे बच्चों के लिए उस जगह का सामान्य उपयोग होता है। वह उपयोग जिसके लिए उसे बनाया गया था। बाकी दूसरी प्रजाति के बच्चों के लिए जैसी जिसकी जरूरत। कभी वो जन्मदिन मनाने के जगह के रूप में काम आती है तो कभी वैलेंटाइन का दिन मनाने के जगह के रूप में। अरे शरमाये नहीं, हमें सबकी ख़बर है। हम भी तो कॉलेज के ही "बच्चे" हैं। कभी वो जगह दोस्तों के संग देर रात तक बैठकर तारों से भरे आसमान निहारते हुए गुजरती है तो कभी टीचर्स के नामकरण संस्कार से ले कर उनके वर्गीकरण पर चर्चा परिचर्चा कुछ ठंडे पेय जल और नाश्ते के साथ करते हुए। कुछ बच्चे पेयजल के अलावा भी कुछ पीने की चीज कभी कभी ले आते हैं जैसे.......लस्सी, कोल्ड ड्रिंक,****, आदि। अजी हाँ, हम बच्चे अपने शिक्षकों का नए सिरे से नामकरण संस्कार भी करते हैं। कई बार बच्चे नए नए कॉलेज में आते ही अपने लिए जोड़ीदार की तलाश में लग जाते हैं ताकि वो उनके संग P से पढ़ाई भी कर सके। P से पढ़ाई वाले हँसों के जोड़े अक्सर पुस्तकालयों में बैठे पाए जाते हैं।बाकी P से कुछ और शब्द भी होते हैं जिनका अंदाजा आपको नीचे अंत में मिल जाएगा।

हमारे कॉलेज में इसी तरह का एक स्थान है जिसे हम बच्चे प्यार से RP कह कर बुलाते हैं। 
वैसे तो इस RP का एक अच्छा सा नाम है लेकिन हमने इसका भी अलग ही नामकरण कर रखा है- रोमियो पार्क/रास्कल पार्क। हाँ तो वापस लौटते हैं RP में PR के शीर्षक पर। यहाँ की सबसे अचंभित करने वाली बात मुझे ये लगती है कि इस पार्क को शाम में सब टहलने घूमने बैठने वालों से खाली करवा दिया जाता है। फिर थोड़ी साफ़ सफाई करवा कर अच्छे से यहाँ पार्क में लगी लाइट्स से जगमग कर दिया जाता है। अगर कोई देखे उस वक़्त तो पार्क से हमारे कॉलेज के मुख्य भवन के सामने का नजारा प्रथम राष्ट्रपति के मूर्ति के साथ हल्की रौशनी के साथ बहुत ही अच्छा दृश्य देता है (ये राज की बात है कि सबको निकाले जाने के बाद भी मुझे इस दृश्य के बारे में कैसे पता है?)। 
अब ये तो पता नहीं कि सभी घुमक्कड़ जंतुओं और विद्यार्थियों को पार्क से बाहर कर के इतनी रौशनी कर के राष्ट्रपति जी को ऐसा कौन सा आंनद मिलता है। लेकिन ठीक है सबकी अपनी व्यक्तिगत जिंदगी होती है। मूर्ति की भी होगी जो वो हम सबके सामने बिताने में कतराते होंगे। वैसे सूत्रों से पता चला है कि राष्ट्रपति जी ने अक्सर अंधेरे में अपने सामने कुछ कलियों को खिलते खिलखिलाते देखा है। कुछ भँवरों को रात में पार्क में इधर उधर भटकते देखा है। खैर अब हम प्रकृति माता से तो कुछ नहीं कह सकते लेकिन फिर भी अगर प्रकृति में मौजूद कलियों और भँवरों तक हमारी यह रचना पहुँचे तो उनसे अनुरोध है कि राष्ट्रपति जी की व्यक्तिगत जिंदगी को भी थोड़ा ध्यान में रखें और फिर अपने कार्यों में संलग्न होवें। 
बाकी RP में PR की घटना कोई नई नहीं है। गुप्त सूत्रों की माने तो इसका इतिहास काफी पुराना है। RP शुरू से ही PR की जगह रही है। इसके पीछे एक पुरानी मान्यता छुपी है। जिसके अनुसार RP में PR करने से परीक्षाओं का परिणाम काफी हद तक बदल सकता है क्योंकि पार्क में करने से आप प्रकृति के करीब होते हो तो आपका तनाव काफी कम रहता है। आप मन से कर पाते हो........... P से पढ़ाई। बाकी जिसकी जैसी जरूरत वैसे उसके विचार और वैसा उसका परीक्षा में प्रदर्शन। खैर RP में PR (पढ़ाई रोजाना) तो मैंने भी किया है। खासकर परीक्षा के दिनों में जब Viva चल रहा हो या शुरू होने वाला हो तो उसके पहले RP में ही PR (पढ़ाई रोजाना) होती थी। ये तो आपने भी किया होगा।

अब हम चले पढ़ाई करने अन्यथा हमें सिलेबस का तनाव हो जाएगा और हमारे संग तो कोई जोड़ीदार भी नहीं है। बाद में सभी कहेंगे कि RP में PR वाले हमारी P से पढ़ाई की बेइज्जती करते रहते थे, अब तुम्हारा P से परिणाम बिगड़ गया न।

सन्दर्भ:
RP- अब तक तुम्हें इसका मतलब नहीं पता चला? डे स्की हो क्या? कॉलेज में रहा करो तब न पता रहेगा।
PR- पढ़ाई रोजाना/प्यार रोमांस(जिसकी जैसी जरूरत)
हंसों का जोड़ा- कोरोना काल में मेडिकल कॉलेज का हाल भाग 1
बच्चे- कॉलेज में पढ़ने वाले हम सब विद्यार्थी(खासकर UG वाले)
****- 18+ पेय पदार्थ, छोटे बच्चों के समझने की चीज नहीं है।
पुस्तकालय- लाइब्रेरी
रोमियो पार्क- हंसों के जोड़े के लिए
रास्कल पार्क- बकैतीबाज दोस्तों के समूह के लिए
घुमक्कड़ जंतुओं- कैंपस के नामुराद कुत्ते
कलियाँ- हैं....बड़ी उत्सुकता है जानने की? जो आप सोच रहे हो वही।
भँवरे- ऊपर वाला सोच लिया तो ये भी पता कर लो
संलग्न- involve

धन्यवाद
आपका वरीय/कनीय/मित्र
वरुण (२०१७ बैच)
©Inking Scalpel®